लोग अक्सर "Best places to visit near Varanasi in 2 days" सर्च करते हैं, क्योंकि ज़्यादातर यात्री दो रात का ही प्लान बनाकर आते हैं। बनारस में देखने को इतना है कि सब कुछ दो दिन में नहीं निपटेगा, पर मुख्य चीज़ें आराम से हो जाती हैं। नीचे का क्रम आने-जाने के समय और भीड़ को ध्यान में रखकर बनाया है।
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पहला दिन: घाट, मंदिर और आरती
पहले दिन शहर के अंदर रहें। बनारस की गलियाँ गाड़ी से नहीं, पैदल घूमने की चीज़ हैं, इसलिए ज़्यादा दूर जाने की योजना न रखें।
- सूर्योदय के आसपास किसी घाट पर पहुँचें, जैसे असी या दशाश्वमेध। फिर नाव से घाटों की कतार देखें। नाव की जानकारी यहाँ है।
- नाश्ते में कचौड़ी-जलेबी या लस्सी जैसी स्थानीय चीज़ें खाएँ।
- दोपहर से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करें। भीड़ से बचने के लिए जल्दी जाना ठीक रहता है। मंदिर के बारे में यह पेज देखें।
- दोपहर में होटल लौटकर थोड़ा आराम करें। गर्मियों में धूप तेज़ होती है।
- शाम को दशाश्वमेध या असी की गंगा आरती देखें। समय मौसम के साथ बदलता है, इसलिए पहले पूछ लें।
दूसरा दिन: सारनाथ और आसपास
सारनाथ बनारस से लगभग 10 किलोमीटर दूर है और ऑटो, टैक्सी या कैब से आराम से पहुँचा जा सकता है। यह वही जगह है जहाँ गौतम बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था। यहाँ का स्तूप, खंडहर और संग्रहालय देखने लायक हैं।
संग्रहालय और स्मारक के खुलने के दिन और टिकट बदलते रहते हैं, इसलिए मैं यहाँ कोई समय या रकम नहीं लिख रहा। जाने के दिन गेट पर लगा बोर्ड देख लें।
- सुबह जल्दी सारनाथ पहुँचें, ताकि धूप से पहले ज़्यादातर चीज़ें देख लें।
- दोपहर बाद रामनगर किला या गंगा के उस पार जाना हो, तो समय पर निकलें। यह पुल या नाव से पहुँचने की जगह है।
- शहर में बचा समय हो तो संकट मोचन और बीएचयू के मंदिर वाले इलाके में जा सकते हैं।
तीसरा दिन मिल जाए तो
अगर दो दिन से थोड़ा ज़्यादा समय है, तो विंध्याचल देवी दर्शन का विकल्प रखें। यह बनारस से लगभग 70 किलोमीटर दूर है और सुबह निकलकर शाम तक लौटा जा सकता है। इसकी जानकारी विंध्याचल पेज पर है।
इसी तरह प्रयागराज और अयोध्या जैसी जगहें अलग यात्रा की माँग करती हैं और दो दिन के प्लान में नहीं बैठतीं। उन्हें अलग से रखें।
दो दिन का आसान सारांश
नीचे की तालिका में सिर्फ़ क्रम दिया है, कोई समय नहीं, क्योंकि समय मौसम और भीड़ के हिसाब से बदलता है।
| समय | पहला दिन | दूसरा दिन |
|---|---|---|
| सुबह | घाट और नाव सैर | सारनाथ |
| दोपहर | काशी विश्वनाथ दर्शन, फिर आराम | रामनगर किला या शहर के मंदिर |
| शाम | गंगा आरती और गलियाँ | खरीदारी और वापसी की तैयारी |
आने-जाने और ठहरने के सुझाव
- घाटों के पास ठहरें, ताकि सुबह की सैर और शाम की आरती में पैदल जा सकें। होटल की जानकारी हमारे होटल पेज पर है।
- सारनाथ और आसपास के लिए दिनभर की टैक्सी लेना सस्ता और आरामदेह पड़ता है। पहले किराया और रुकने के घंटे तय कर लें।
- बनारस पहुँचने के सारे तरीके यहाँ हैं। जगहों की पूरी सूची डेस्टिनेशन पेज पर है।
- त्योहार और सावन में भीड़ बहुत होती है। उन दिनों हर चीज़ में ज़्यादा समय रखें।
बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ
घाटों की सीढ़ियाँ ऊँची-नीची हैं और गलियाँ तंग। बुज़ुर्ग साथ हों तो पैदल का हिस्सा कम रखें और ज़्यादा जगह गाड़ी से जाएँ। मंदिर में भीड़ वाले समय बच्चों का हाथ पकड़कर रखें।
नाव सैर बच्चों को पसंद आती है, पर लाइफ़ जैकेट के बारे में नाविक से ज़रूर पूछें। सुबह की नाव में हवा ठंडी रहती है।